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260 of 350 Died, But They Saved Thouands!

#StoriesofHumanity इतिहास में कुछ पन्ने ऐसे भी दर्ज हैं जहां इंसानियत को जिंदा रखने के लिए पूरी की पूरी बस्ती ने मौत को गले लगाना स्वीकार कर लिया। यह कहानी साल 1665 के इंग्लैंड के एक छोटे और शांत गांव इयाम की है। उन दिनों लंदन में प्लेग का भयंकर तांडव चल रहा था। इसी दौरान इयाम गांव के एक स्थानीय दर्जी ने लंदन से कपड़ों का एक पार्सल मंगवाया। दुर्भाग्य से उस नम कपड़े में प्लेग फैलाने वाले पिस्सू छिपे हुए थे। कुछ ही दिनों में वह दर्जी और उसका पूरा परिवार खत्म हो गया। देखते ही देखते महामारी ने पूरे गांव को अपनी गिरफ्त में ले लिया। संकट के उस दौर में इंसानी फितरत अमूमन यही कहती है कि भागो और अपनी जान बचाओ। लेकिन इयाम के लोगों को यह बखूबी अहसास था कि अगर वे वहां से भागे, तो यह जानलेवा बीमारी आस-पास के तमाम शहरों और हजारों निर्दोष लोगों तक फैल जाएगी। ऐसे में गांव के दो पादरियों, विलियम मोम्पेशन और थॉमस स्टेनली ने ग्रामीणों के सामने एक बेहद कठिन प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर इस गांव को पूरी दुनिया से अलग कर देंगे, यानी न कोई बाहर जाएगा और न कोई अंदर आएगा। आज के समय में जब छोटी-मोट...