सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

BatRas on Spotify

BatRas @ Spotify

हाल की पोस्ट

Episode 3 | Prof. S. D. Muni

गोरखपुर विश्वविद्यालय में ग्रेजुएशन में जब पहले साल मेरा नम्बर बहुत अच्छा आया तो मेरे एक सीनियर राजीव रंजन भैया ने मुझे कहा- इंडिया में अव्वल पढ़ाई करनी है सोशल साइंस में तो जेएनयू में पढ़ना चाहिए। मैंने पहली बार जेएनयू का नाम 2003 में सुना था। जमाना तब मोबाइल का नहीं हुआ था, इंटरनेट होता है, कुछ मेल जैसी चीज होती है, आम लोगों को इतना पता था। जगह-जगह पीसीओ एसटीडी के बूथ होते थे, लैंडलाइन जमाने के बाद वही क्रांतिकारी लगता था।  जिनसे हम ख़ौफ़ खाते थे, वे भी जेएनयू के नाम पर क्या बड़ा चेहरा बनाकर तारीफ़ किया करते थे। मैं भाग्यशाली रहा, जेएनयू ने मुझे अपनाया। जेएनयू में जो प्रोफेसर मिले, वे सभी अनूठे। हर किसी का अपना व्यक्तित्व, सबसे बड़ी बात वे स्टूडेंट्स से बात करने को हरदम तैयार दिखते। मैं दक्षिण एशिया विभाग में विद्यार्थी हुआ तो मेरे विभाग में नामचीन प्रोफेसर्स की लंबी फेहरिस्त थी- प्रो. बिमल प्रसाद, प्रो. उर्मिला फड़नीस, प्रो. कलीम बहादुर, प्रो. मोहम्मद अयूब, प्रो. मुचकुंद दुबे, प्रो. पार्था एस. घोष, प्रो. एस.डी. मुनि, प्रो. सी. राजामोहन, प्रो. महेंद्र पी लामा, प्रो. आई. एन. मुखर्...

Episode 2 | Dinesh Bawra

बतरस का पहला एपिसोड शूट हो गया था।  पोस्ट- शूट ढेरों चीजों को हम समझ ही रहे थे, तब तक दिनेश बावरा भैया का ह्वाट्सऐप पर मैसेज आ गया था कि वे दिल्ली आ रहे हैं और हमारी बातचीत हो जाएगी। मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। मैं बावरा भैया से पहली बार मिलने वाला था, हालांकि फ़ोन पर बात कई बार हुई थी। हम सबके आदरणीय अभिषेक शुक्ल निश्छल भैया ने बावरा जी से मेरी बात जब करायी थी तब वह बातें मैंने राजनीति शास्त्र के एक विद्यार्थी के तौर पर की थीं उनसे, सालों पहले।  दिनेश भैया सामाजिक-राजनीतिक तौर पर एक संवेदनशील और जागरूक व्यक्ति हैं। अपना क्षेत्र, अपना समाज पिछड़ा ना कहलाए, युवाओं के आदर्श,  क्षेत्र के गुंडे-मवाली-बदमाश से हटकर वे शानदार लोग हों जो अलग- अलग क्षेत्र में अपना लोहा मनवा रहे हैं, ऐसा वे चाहते रहे हैं। जब मैंने दिनेश बावरा जी से फ़ोन पर पहली बार बात की तो मुझे लगा इतना आदर्श कौन सोचता है, क्या सचमुच होते हैं ऐसे लोग? लोग तो मुझे ही किताबी कह देते हैं, सिर्फ़ इसलिए कि मेरा पेशा है पढ़ाना। यहाँ ये व्यक्ति देखिए देश दुनिया में नाम बनाता, सबको हँसाता-सीखता, क्या मंच क्या टीवी क्या...

Blog_BatRas l Episode 01 l Dr. Anurag Arya

Home Page अब ये जानना अजीब लगेगा लेकिन कहना पड़ेगा कि जब मै सांतवीं या आठवीं क्लास में रहा होगा तो अपनी गोदी में छोटे भाई को लिए हुए मुहल्ले में इधर-उधर घूमता रहता था। बाकी दोस्त क्रिकेट खेलते थे, मै नहीं खेल सकता था क्योंकि दो छोटे भाई और एक बहन थी, जिन्हें सम्हालना होता था और मम्मी को घर के काम भी निपटाने होते थे। उस समय खेल-खेल में सवाल पूछने का खेल भी खेलते थे, और मेरे सवाल सबको बड़े पसंद आते थे। इसका एक आनंद आता था, लगा कि इसमें एक तरह की स्मार्टनेस चाहिए होती है। अब बतरस पॉडकास्ट में मेरा काम ही यही है। पहले एपिसोड की बताऊँ तो मै कोई बहुत कॉन्फिडेंट नहीं था। गेस्ट हमने शानदार चुन लिया था, दो लिहाज से- पहला तो वे मेरे पुराने दोस्त हैं, अनुराग आर्या जी के साथ एक स्पिरिचुअल कम्फर्ट था; दूसरे शानदार व्यक्ति के साथ ही वे बड़े ज़हीन और उम्दा लेखक हैं। तो ये तो समझ आ रहा था कि गेस्ट सपोर्टिव हैं, कुछ ऊँच-नीच हुई हमारी तैयारियों में तो सम्हल जाएगा। दूर से पॉडकास्ट जब हम देखते हैं तो लगता है, बस दो माइक, दो सोफ़ा, सवाल और जवाब, बस यही तो है पॉडकास्ट। हमें अब अंदाजा लग रहा था कि हमने किसी अननोन...

Clips-BatRas01 l Ishq Ka Koi Formula Nahi Hota... ❤️

Clips-BatRas01 l Dr. Sahab Ishq Ka Kya Karen?

Clips-BatRas01 I Learning, Unlearning, Relearning in Life with Dr. Anurag Arya