बतरस का पहला एपिसोड शूट हो गया था। पोस्ट- शूट ढेरों चीजों को हम समझ ही रहे थे, तब तक दिनेश बावरा भैया का ह्वाट्सऐप पर मैसेज आ गया था कि वे दिल्ली आ रहे हैं और हमारी बातचीत हो जाएगी। मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। मैं बावरा भैया से पहली बार मिलने वाला था, हालांकि फ़ोन पर बात कई बार हुई थी। हम सबके आदरणीय अभिषेक शुक्ल निश्छल भैया ने बावरा जी से मेरी बात जब करायी थी तब वह बातें मैंने राजनीति शास्त्र के एक विद्यार्थी के तौर पर की थीं उनसे, सालों पहले। दिनेश भैया सामाजिक-राजनीतिक तौर पर एक संवेदनशील और जागरूक व्यक्ति हैं। अपना क्षेत्र, अपना समाज पिछड़ा ना कहलाए, युवाओं के आदर्श, क्षेत्र के गुंडे-मवाली-बदमाश से हटकर वे शानदार लोग हों जो अलग- अलग क्षेत्र में अपना लोहा मनवा रहे हैं, ऐसा वे चाहते रहे हैं। जब मैंने दिनेश बावरा जी से फ़ोन पर पहली बार बात की तो मुझे लगा इतना आदर्श कौन सोचता है, क्या सचमुच होते हैं ऐसे लोग? लोग तो मुझे ही किताबी कह देते हैं, सिर्फ़ इसलिए कि मेरा पेशा है पढ़ाना। यहाँ ये व्यक्ति देखिए देश दुनिया में नाम बनाता, सबको हँसाता-सीखता, क्या मंच क्या टीवी क्या...
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